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सत्यमेव जयते

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प्रदूषण !

Posted On: 12 Oct, 2017 में

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आदरणीय मित्रों ,….सादर प्रणाम !

हमारे अधिकाँश शहर खतरनाक प्रदूषण के शिकार हैं ,……..पिछले कुछ वर्षों से दीपावली के बाद हमारी दिल्ली का हाल वायु प्रदूषण से बहुत बेहाल हो जाता है ,…पिछले वर्ष ही लम्बे समय तक धुन्वायुक्त स्माग छाए रहने से अपार परेशानी हुई थी !………..स्माग का मुख्य कारण हरियाणा पंजाब में खेतों में पराली जलाए जाने को बताया गया था !……..समस्या से भी बड़ी समस्या यह है कि हम सार्वजनिक समस्या को अपने तुच्छ अहंकारी चश्मे से देखते हैं !……..हमारे पूज्य प्रधानमंत्री जी ने भी पराली दहन से होने वाली हानियों को समझाया था ,…….पराली को उत्तम जैविक खाद में परिवर्तित करने का सफल प्रयोग भी बताया था !…….बहुविधि प्रयासों से जागृति बढ़ी है ,…लेकिन …….कुछ किसान अपनी स्वार्थी राजनीति के चलते झंडे प्रदर्शन सहित पराली जलाने का अधिकार प्रदर्शित करते हैं !………इसे स्वार्थी मूर्खता के सिवा क्या कह सकते हैं !…….

इसबार प्रदूषण नियंत्रण के लिए माननीय न्यायलय ने दिल्ली में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबन्ध लगा दिया है !.. ..माननीय न्यायालय का यह आदेश अत्यंत सराहनीय है ,…लेकिन कुछ लोगों को इसमें खोट दिखता है ,…..एक प्रख्यात लेखक और एक राज्यपाल का सार्वजनिक विरोध दर्ज कराना इसबात की पुष्टि करता है कि हमारी उन्नत दिखने वाली मानवता के चश्मे भी बदरंग हो चुके हैं !…….दीपावली हमारा महान त्यौहार है ,….लेकिन यह पटाखावली तो कदापि नहीं है !………जो लोग पटाखों को दीपावली की अनिवार्य परम्परा मानते हैं वो वास्तव में हमारी पावन परम्पराओं से पूर्ण अनभिज्ञ हैं !…….. ….दीपावली की महिमा का बखान करना न इस लेखक के लिए संभव है और न ही इस लेख का उद्देश्य है !…….हमें इतना ही समझ लेना चाहिए कि धर्मविजय के पश्चात प्रकाश पर्व का अनुपम उत्साह होता है !……..इस रात हम घर चौबारों खेतों बगीचों धर्मस्थानों के साथ गोबर गड्ढों तक को प्रकाशित करते हैं !……….राष्ट्रकवि की कविता हम पढ़ते आये हैं …..जलाओ दिए पर रहे ध्यान इतना –अँधेरा धरा पर कहीं रह न जाए !……..

..दीपावली बाह्य प्रकाश करने के साथ आतंरिक प्रकाश पाने का परम पावन पर्व है !………इस रात को पटाखों के पापी प्रयोग से हम इस पर्व को मिथ्या बना देते हैं !………परमपूज्य स्वामी रामदेव जी वर्षों से हमें नित्य पवित्र शिक्षा देते आये हैं !……..दीपावली के साथ कई पुण्यप्रसंग जुड़े हैं ,…….वैदिक भारत की शारदीय नवषष्टयेष्टी दीपावली, सुगन्धित यज्ञ दीप मिष्ठान्न दान अपनत्व सामूहिकता का महान पुण्यपर्व है ,……हम अपनी मूर्खता से इसे आतिशबाजी शराब मांसाहार जुआ जैसी घातक विकृतियों में बर्बाद कर देते हैं !……..हम निःसंदेह मूर्ख हैं ,……प्रश्न यही उचित है कि क्या हम अपनी मूर्खता का त्याग करने में तत्पर होंगे या नियति विधि हमें डंडा मारकर सुधारेगी !………….पटाखों के शोर और धुंवे से प्रत्येक मानव पशु पक्षी पेड़ पौधे सब पीड़ित होते हैं !………..दीपावली पर यह मूर्खता असह्य हो जाती है ,…..हमारे तमाम सिख बन्धु कार्तिक पूर्णिमा श्री गुरुनानकदेव की जयंती पर भी भारी आतिशबाजी करते हैं !…….यह सब गलत है ,…आतिशबाजी नाजायज मूर्खता है !……….प्रत्येक शिक्षा हमें पवित्र आतंरिक प्रकाश, स्थायी प्रसन्नता पाने की प्रेरणा देती है !……..व्यर्थ बाहरी हानिकारक दिखावे हमारे अंतःकरण को और दूषित करते हैं !…..त्वचा प्राण मन बुद्धि समेत सम्पूर्ण अस्तित्व पीड़ित होता है !……..श्वांस रोगियों की भयानक पीड़ा समझनी चाहिए ,…….सर्वहित में हम सबको अपने चश्मे साफ़ रखने चाहिए !…………आज हमारे पूज्य प्रधानमंत्री जी ने मिट्टी के दीये जलाने की प्रेरणा दी है !………..कुछ बेगैरत स्वार्थी लोग इसमें भी राजनीति ढूंढ सकते हैं !……..स्वदेशी भक्त संघ की फैलती निष्कामी सुगंध से लोभी विदेशी भक्तों को अक्सर अतिसार नजला जुकाम होता रहता है !……..मोमबत्ती गैंग वाले अल्पज्ञ मानव मोमबत्ती के समर्थन में मार्च भी निकाल सकते हैं !……..आजकल शल्यवृत्ति भी पर्याप्त चर्चा में है !…….बहरहाल …..भगवत्ता के लिए सबकुछ उपयोगी ही होता है !……वास्तव में कुछ भी भगवत्ता से बाहर हो ही नहीं सकता है !……घोरतम से घोर नास्तिक भी भगवत्ता का बराबर भागीदार है !…….पापी आस्तिकों के लिए परिणाम और भयानक हो सकते हैं !

……दिल्ली में माननीय न्यायालय का निर्णय सादर प्रणाम के योग्य है !……….न्यायालयों को अपनी महान गरिमा के अनुसार कार्य करते रहना चाहिए !………सरकारों ,संस्थाओं ,व्यक्तियों सबकी चश्माविहीन जिम्मेदारी भी है !………आज भारतीय सत्ता शिखर पर पूर्ण समर्पित सत्यनिष्ठ नेतृत्व विद्यमान है !……राजनीति की आवश्यकताएं अलग हो सकती हैं ,…लेकिन महान मोदी सरकार तुच्छ राजनीति से बहुत ऊपर निकल चुकी है !………..हमारी समस्त धर्म संस्थाओं ,……धार्मिक ज्ञानी व्यक्तियों का और महान दायित्व है ,…….भरपूर व्यापक जनजागरण द्वारा धर्मोत्सवों पर पटाखों का पूर्ण आत्मनिरोध अनिवार्य होना चाहिए !………..आतिशबाजी के निर्माण कारोबार पर पूर्ण नियंत्रण होना चाहिए !……पटाखों के आयात पर पूर्ण प्रतिबन्ध होना चाहिए !………..अधिक लुभावने चीनी पटाखे अत्यंत खतरनाक प्रदूषण फैलाते हैं !……….अन्य चीनी सामानों के उपभोग पर सम्पूर्ण भारतीयता को आत्मनियंत्रण करना चाहिए !

..आजकल शादियों में पटाखों आतिशबाजी का अत्यंत दिखावा होता है ,..वस्तुतः …शादियाँ ही दिखावा बन गयी हैं !……..हम अपने अहंकार में आगाज अंजाम का उद्देश्य अनुमान भी भूल जाते हैं !………..ग्रामीण अंचलों में पहले बारात पहुँचने ,…द्वाराचार होने ,…..विवाह विधि संपन्न होने ,……विदाई ,…..आगमन ,…. जन्म, …मुंडन आदि शुभ सूचनाओं के सहज क्षेत्रीय प्रसार के लिए पटाखों का अतिसीमित प्रयोग होता था !……..अब राम जाने क्या क्या होता है !…….चमक देखो तो आँखें जलें,… सुनो तो कानधंश हो ,….कुछ न करो तो सांस में जहरीला धुंवा ,…..श्वांस से पूरा मानव संयंत्र प्रभावित होता है ,…..त्वचा प्रदूषित वायु का शिकार !…..तनिक लापरवाही से अनचाहे धमाकों में प्राणाघात !…..ऐसी मूर्खता हम कैसे जारी रख सकते हैं !……..गरीबी से जूझ रहे विकासशील देश में भी बेवजह बेतहाशा धन फूंका जाता है ,…… धरती पर जड़जीवन के लिए अज्ञात,…चैतन्य को ज्ञात पीड़ा फैलाई जाती है !………वास्तव में मानवता अपनी मूर्खताओं से ही कष्ट पाती है !……..हो चुकी मूर्खताओं के बदले में हमें अधिक दान यज्ञ करना चाहिए !…बहरहाल ….

मानवता की समस्याएं दुर्गंधी पटाखों से बड़ी अधिक विस्फोटक हैं !………मानवता विकारों के व्यापार से बड़ी मुसीबत में है !……….वस्तुतः अहंकार ही हमारा सर्वोच्च प्रमुख विकार है ,….यद्यपि यह सीमित उन्नति का औजार भी है ,……फिरभी ……योगसाधक के लिए यह अज्ञान महाविकार है !……….प्रत्येक विकार का कहीं न कहीं से उपचार भी अवश्य होता है ,……….सम्पूर्ण विकारहीनता से अकल्पनीय उन्नति संभावित है ,…..सामान्य मानवता को निष्पक्ष होकर देखना होगा कि,… इस दुर्दांत दैवयोग में हमारे परमपिता किस किस घट में, किन किन रूपों में अवतरित होते हैं !………….. मानवता अवाक हो सकती है !……….मानव बुद्धि के लिए अगम्य इस परमलीला में अनंत परमेश्वर की सक्रिय उज्जवल सहभागिता अभिव्यक्त होनी अनिवार्य है !……….स्वघोषित भगवानों, स्वार्थी विद्वानों, अज्ञानी बुद्धिजीवियों, कुंठित पापियों और हम सबको यह पता होना चाहिए कि ,.. …..भगवत्ता गुरुसत्ता को सबकुछ पता है !………..परमपूज्य महर्षि पतंजलि का पूर्ण महानतम अष्टांग योग ही मानवता को पूर्णता के नए शिखर पर आरोहित कर सकता है !…….अन्य तमाम धाराएं इनको ही पुष्ट करती हैं !…..वेद में सबकुछ है ,…….वेद से सब शुभ ही शुभ है !……..वेद से बाहर सबकुछ अशुभ है !………….वेद को सम्पूर्णता से समझना उच्चशिक्षित किन्तु कोरे व्याकरण शब्दज्ञानियों के लिए भी नितांत असंभव है !…………..भागवत वैदिक प्रकाश में संसार की सभी अमृत धाराएं सुगम मेलजोल बढ़ाएंगी !……..अमानुषी अनुपयोगी स्वांगियों का समय शीघ्र पूरा होगा !……..मानवता की महानतम तपस्या शीघ्र ही अपने प्रचंड प्रकाश से फलीभूत होगी ,…….बहुप्रतीक्षित स्वर्णिम नववैदिक युग के शुभप्रारंभ का समय अत्यंत निकट है !…….तबतक हमें अपने चश्मे साफ़ करते रहना चाहिए !….प्रत्येक प्रदूषण मिटाने के प्रयत्न होते रहने चाहिए !…….…….जय पतंजलि – जय जय भारत !………..सत्यमेव जयते !………ॐ शान्ति !……….भारत माता की जय !!……………वन्देमातरम !!!

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