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सत्यमेव जयते

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अर्थतंत्र !

Posted On: 29 Sep, 2017 में

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आदरणीय मित्रों ,….सादर प्रणाम !

वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व केन्द्रीय वित्त मंत्री श्री यशवंत सिन्हा जी ने वर्तमान भारतीय अर्थदशा की मुखर आलोचना की है !………….पिछली दो तिमाहियों में विकासदर में मामूली कमी उनकी उद्द्वेलना का मुख्य कारण है !……..उन्होंने नोटबंदी और वस्तु एवं सेवा कर को आर्थिक गिरावट का मुख्य कारण बताया हैं !………..यद्यपि उनके ही सुपुत्र एवं वर्तमान वित्त राज्यमंत्री श्री जयंत सिन्हा जी ने उनको उचित उत्तर दे दिया है !…………..परिवर्तन से तात्कालिक परेशानियों का संकेत स्वयं प्रधानमंत्रीजी कर चुके थे !……उन्होंने कहा था कि नया चश्मा भी कुछ दिन तकलीफ देता है !………….नया भारत अपना धुंधला चश्मा बदल चुका है !……लम्बे अँधेरे से अचानक प्रकाश में आने पर भी दृष्टि झिलमिलाती है !………परेशानियों का दौर भी निपटने ही वाला है !……..यशवंत जी की बातों का अपना कारण हो सकता है ,…….लेकिन,….. पिछली सरकारों को निर्दोष बताना उनकी दृष्टि अत्यंत कमजोर पड़ने का प्रमाण लगता है !………..पूरी तरह पिट चुके भ्रष्ट कांग्रेसी भाईलोगों को भौंकने का मौका मिल गया !……..हम सब जानते हैं कि कुटिल लोभी कांग्रेस के खाऊपने से इस देश में बड़ी समानांतर काली अर्थव्यवस्था खड़ी हो चुकी थी !………..देशद्रोहियों से गहन राजसिक सांठगाँठ के चलते हजार पांच सौ के नोटों में बीस प्रतिशत से भी ज्यादा नकली मुद्रा मिल चुकी थी !………नोटबंदी से महज एक प्रतिशत लाभ देखने वाले वास्तविकता को बेशर्मी से नजरअंदाज कर रहे हैं !……..लाखों फर्जी हवाला कंपनियों से किसकी उन्नति होती थी !………..दसियों तरह के कर से किसका भला हो रहा था !…….कितने काले धंधेबाज कर देने के विषय में कभी सोचते भी नहीं थे !……….काली कमाइयों से कुत्सित देशद्रोही कारनामे ही होते हैं !………..हम यशवंत जी से इतनी सतही विश्लेषण की आशा तो नहीं करते हैं ,…..फिर भी हम उनके आभारी हैं क्योंकि इस मंथन से देश को संभवतः कुछ और अमृत मिल जाय !

वैसे भ्रष्ट कांग्रेस और उसके लगुवे भगुवे राजदल आवश्यक आलोचना करने का अधिकार भी खो चुके हैं !………..सत्ताखोरी की लोभी लत के चलते कुटिल कांग्रेस अब विपक्षी कहाने लायक भी नहीं बची है !…. बेचैन कांग्रेसी युवराज वोट के लिए अब मंदिरों में भी जाने लगे हैं !…..कभी इन्ही मंदिरों में उनको छेड़खानी करने वाले लोग दूर से दिखते थे !………गुजरातियों को गधा मानने वाले बुद्धिहीन बनावटी नेता अब सत्ता के लिए उनके क़दमों में बिछे दिखते हैं !……बहरहाल जर्जर कांग्रेसी जहाज का डूबना ही उसकी नियति है !……परमलोभी अमानुषी सोनिया गांधी के कुत्सित कुकर्मों का कुफल कांग्रेस को भोगना ही पड़ेगा !……..अब हजारों सैम पित्रोदा मिलकर भी कांग्रेस का कुछ नहीं बचा पायेंगे !……भ्रमित भ्रष्ट लोभी अहंकारी दुष्ट दोगले अबतक मोदी सरकार पर उद्योगपतियों की सहायता का आरोप लगाते थे ,….अब उसी माउथपीस से उद्योगों की बदहाली का आरोप बेशर्मी से लगाते हैं !……..बहरहाल ताली और गाली दोनों पर कप्तान का अधिकार है ,…..अविवेकी गाली देने वालों को परिणाम पहले देखना चाहिए !…………कुटिल राक्षसी कांग्रेस गांधीजी को अपना निजी जायदादी बाप मानती है लेकिन उनकी किसी बात को नहीं मानती है !……..स्वच्छता अभियान का मजाक उड़ाना भी गन्दी कांग्रेस को बहुत गहरे दफ़न करेगा !…….गांधीजी का कांग्रेस को समाप्त करने का स्वच्छ विचार अब पूरा हो रहा है !………मुद्दे पर आते हैं ….

लोभान्ध काले कुबेरों के पेट में मची मरोड़ें मिटने वाली नहीं है ,…..सत्यनिष्ठा अपनाने से ही उनकी पीड़ा का इलाज संभव है !…….पूज्य मोदीजी दूरदर्शी महामानव हैं !……..उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को कीचड़ कालिख से निकालकर सत्यनिष्ठ सुखदायी उज्ज्वलता के पथ पर पहुंचाया है !…….परिवर्तन में कष्ट परिश्रम अनिवार्यतः होता है !……..उसका पारिश्रमिक भी अत्यंत महान होता है ,….हमें धैर्यपूर्वक सुखद परिणाम की प्रतीक्षा करनी चाहिए !……..इस मामूली कागजी मंदी का आम जनता पर कोई प्रभाव नहीं है !…..उल्टा हमारी तमाम आम जरूरतें सस्ती हुई हैं !……..कर व्यवस्था व्यापक और सुगम हुई है !…….निकट भविष्य में हमारी वृद्धि दर दहाई भी पार कर सकती हैं !…..लाखों लाख नए करदाता बने हैं !…….अब हमारी स्थायी अर्थव्यवस्था अडिग उड़ान भरेगी !……..पर्याप्त कर संकलन होने पर कर दरों में और कमी संभावित है !……..कुछ क्षेत्रों में करोड़ों अरबों कमाने वाले लोग देश को कुछ भी नहीं देते थे ,…..उनकी परेशानी देश की परेशानी नहीं है !…….उनके कंगाल होने पर भी देश को लाभ ही होगा !……….भ्रष्टाचार के लती लोग अब बच नहीं सकते हैं !………… जड़ मलिनता की स्वाभाविक दुर्गन्ध हटने पर और दुर्गन्ध फैलाती है ,…लेकिन यह अस्थायी होती है !…..स्थायी तौर पर उसकी जगह पुष्पित सुरभित उपवन भी बन सकता है !

हमारे सामने चुनौतियाँ भी हैं !………जीएसटी नेटवर्क से शिकायतें आ रही हैं !……..खाऊराजों में अधिकारी तंत्र की शिथिलता स्वाभाविक है !…..लम्बे खाऊ कांग्रेसीराज में आधिकारिक शिथिलता की आदत पड़ चुकी होगी !…….इससे निपटने के लिए हमारे पास सुयोग्य समर्थ राजनैतिक नेतृत्व है !……वित्तमंत्रालय की कार्यपद्धति और सुधारी जा सकती है !…….पूज्य प्रधानमंत्रीजी की अथक कर्तव्यनिष्ठा प्रत्येक समस्या का सार्थक समाधान करेगी !…….कामचलाऊ राजनीति से बहुत ऊपर उठकर क्षमताओं योग्यताओं संसाधनों का समुचित प्रयोग करना उनको आता है !……उनके लिए राष्ट्रनीति ही सर्वोपरि है !…….यदि उनकी दृष्टि में आदरणीय अरुण जेटली जी से अधिक सक्षम व्यक्ति कोई होगा तो वो अवश्य ही उसे वित्तमंत्रालय सौंपेंगे !……..अरुणजी के कनिष्ठ साथी के रूप में शांत मृदु जयंत जी प्रभावी मंत्री हैं ,…….. तूफानी अंदाज के लिए विशिष्ट मेधाशाली माननीय सुब्रमण्यम स्वामी जी भी उपलब्ध हैं !……..महान स्वदेशी अर्थशास्त्री श्री गुरुमूर्ति जी भारत सेवा में सतत लीन हैं !………बहरहाल … हमें बेकार चिंता नहीं करनी चाहिए ……..भारतीय अर्थव्यस्था सनातन सुदृढ़ है ,…हमें पूज्यनीय धरती माता ने बहुत संपन्नता सौंपी है !………दलदली आर्थिक कालिख से भी हम निकल चुके हैं !……हमारे अर्थतंत्र को और तीव्रगामी उन्नतिशील लोकहितैषी बनाने के लिए हमारी श्रेष्ठ सरकार सभी प्रयत्न करेगी !…….यहाँ एक बात कहनी बनती है ,…..हमें सबका सम्मान करना चाहिए ,…..लेकिन विदेशी अन्धानुकरण से बचना होगा !……..हम अकेले भी अपनी अर्थव्यवस्था को सफलता से संभाल सकते हैं !……महान आचार्य चाणक्य ने संसार को उत्तमतम अर्थशास्त्र दिया है !…..अर्थव्यवस्था का संतुलित स्वदेशीकरण अनिवार्य है !……….भारी बेईमान बैंकों बैंकरों से हमें भरसक बचना चाहिए !……..अति या पूर्ण डिजिटल लेनदेन भारतीय परिस्थितियों में संभव नहीं लगता है !………यथासंभव प्रसार पुरस्कार प्रयास हो सकते हैं लेकिन ,……अकारण जोर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए !………बचत खातों पर बैकों द्वारा लगाए जाने वाले न्यूनतम चार्जों पर भी नियंत्रण होना चाहिए !……..गरीब और जनधन योजना वाले खातों पर न्यूनतम चार्ज नहीं लगना चाहिए !………यदि यह बैंकों के पोषण के लिए अतिआवश्यक भी हो तो भी नहीं लगना चाहिए !…….इसकी जगह यदि किसी बचत खाते में एक हजार से कम राशि है तो बैंक ब्याज न देने का प्रावधान अपना सकता है !…….बैंकों के सार्थक विलय के यथार्थ प्रयास होने चाहिए !…..

अर्थतंत्र को तेज सार्थक गति देने के लिए हमें सतत प्रयास करते रहने चाहिए !…..मुद्रा योजना ,स्टार्टअप इण्डिया ,मेक इन इण्डिया आदि योजनाओं अभियानों से हमारी अर्थव्यवस्था अत्यंत तीव्रगामी होगी !…….हमारे लिए एक विषय चिंता का है ,….अब तक हमारी अधिकाँश मानसिकता नौकरी करने की रही है ,…..इसे बदलने के लिए अत्यंत पुरुषार्थ करना होगा !……सृजनकारी स्वरोजगार उन्नति का सर्वश्रेष्ठ समाधान है !……सरकार और समाज को मिलकर तीव्र पुरुषार्थ करना होगा !……हमें नौकरों की फ़ौज से अधिक मालिकों की मानसिकता खड़ी करनी होगी !…….हमारे पूज्य प्रधानमंत्रीजी ने हमें बार बार प्रेरणा दी है,. ….इसके परिणाम भी आ रहे हैं !……अब हम आशा करते हैं कि इसके क्रांतिकारी परिणाम मिलेंगे !…..देश को तमाम लोकोपयोगी अविष्कारों यंत्रों वस्तुओं सेवाओं की आवश्यकता है !……..हम विश्वास करते हैं कि हमारी वैज्ञानिक सोच सार्थक सुफल देगी !……..भारत में तमाम अद्भुत आविष्कार माडलों तक सीमित रह जाते थे ,….अब उनके परिमार्जित उत्पादन की आवश्यकता है !……..उन्नत संसार के सहयोग से हम विशाल निर्माण तंत्र भी खड़ा कर रहे हैं ,…करते रहेंगे !……..हमारी प्रचुर युवाशक्ति अतुलनीय सामर्थ्य रखती है !……हम मिलकर सबकुछ कर सकते हैं !…….अब तक बेलगाम अफसरशाही के अपराध सीमित हो रहे हैं ,……बाबूतंत्र को सतत सुगम स्वच्छ सुदृढ़ करते रहना होगा !…….हमें याद रखना होगा कि उद्दम व्यापार अर्थतंत्र संसार के लिए है ,……जब संसार व्यापार के लिए हो जाता है तो मानवता की हानि होती है !….आज दुर्भाग्यवश से संसार में ऐसा हो रहा है !………..हमारे शीर्ष समर्थ उद्दमियों में उच्च आदर्शों के प्रति सराहनीय समर्पण भाव है !…….भारतीय अर्थतंत्र को तीव्र सुगम गति देने में हमारा प्रत्येक उद्दमी अपना अनमोल योगदान देगा !…………..अर्थतंत्र के महत्वपूर्ण नियामकों को सम्पूर्ण शुचिता धारण करनी होगी !…..चार्टर्ड एकाउंटेंटों को दिया मोदीजी का प्रभावी सन्देश अत्यंत महत्वपूर्ण है !……..अब भारत आर्थिक स्वच्छता के माहौल में अपनी उत्कृष्ट उन्नति पायेगा !……उद्दमिता व्यापक आकार लेगी !

……परमपूज्य पतंजलि संस्थान के पावनी प्रकल्पों से हमें महान शिक्षा लेनी चाहिए !…. ‘अर्थ से परमार्थ’ वर्तमान विश्व का महानतम संकल्प है !……..स्वास्थ्य स्वयं महानतम धन है ,….परमपूज्य स्वामीजी की सिद्ध प्रमाणित योगशिक्षा के प्रसार से ही महान उन्नति मिलने वाली है !……स्वामीजी अब तक लाखों नहीं करोड़ों छोटी बड़ी बीमारियों से देश को बचा चुके हैं !…….आपका जीवन पीड़ित मानवता के लिए आदर्श वरदान है !…….महान पवित्र स्वदेशी अभियान से उनके आलोचक भी लाभान्वित हो रहे हैं !………पूर्ण प्रभावी भारतीय आयुर्वेद से संसार को सम्पूर्ण स्वास्थ्य और भारत को समुचित आर्थिक सामजिक नैतिक उन्नति मिलेगी !…..प्राकृतिक उन्नत कृषि अनुसंधान से बीमार भारतीय कृषि का कायापलट होगा !….. धीरे धीरे ही सही ..‘उत्तम खेती माध्यम बान’ की पुरातन कहावत पुनः चरितार्थ हो रही है !…….हमारी गाय आधारित सनातन कृषि मानवता को वरदान सिद्ध होगी !….गौमय गौमूत्र के प्रभावी प्रयोग से फसली इंसानी स्वास्थ्य सुधरने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को अद्भुत उन्नति मिलेगी !….हमें सूक्ष्म लघु सरल गोबर गैस उपकरणों पर समुचित शोध करना चाहिए !………..सामान्य गौमय भस्म से ही अनेकों कीटाणुजनित रोगों का इलाज संभव है !……जड़ी बूटी युक्त होने पर असाध्य रोगों की सरल चिकित्सा भी संभव होगी !…..गौमय हानिकारक विकिरणों का प्रभावी प्रतिरोधक भी है !……….पतंजलि अनुसंधान संस्थान अनेकों आवश्यक विषयों पर वैज्ञानिक शोध कर रहा है !………..परमपूज्य स्वामीजी के घनघोर पुरुषार्थ से हम आर्थिक मानसिक गुलामी से मुक्त हो रहे हैं !………..बीमारी फैलाकर फिर इलाज बेचकर उन्नति कमाने वाले अंधलोभी व्यापारियों को अपने दृष्टि दोषों का समुचित इलाज करा लेना चाहिए !……..अर्थतंत्र कुछ मुट्ठियों में सीमित नहीं रहना चाहिए !…….आर्थिक उन्नति में प्रत्येक नागरिक का सम्मानपूर्वक सहयोग रहना चाहिए !…….पतंजलि ग्रामोद्योग के तीव्र प्रसार से सम्पूर्ण संसार समुचित अर्थयुक्त होगा !……

‘अर्थ से परमार्थ’ का महानतम विचार मानवता को कल्पनातीत उन्नति देगा !… ….एक प्रकट रहस्य भी दीखता है ,…..परमार्थ में अर्थ निहित है !…..परमार्थिक अस्तित्वों को स्वाभाविक अर्थउन्नति मिलती है !……यहाँ कार्यरत तो हम दिखते हैं लेकिन वास्तविक कार्य कोई महानतम अप्रत्यक्ष सत्ता करती है !………वैदिक गुरूकुलम से निकली महान मेधाएं संसार को वास्तविक पूर्णउन्नति का परमप्रकाश देंगी !….आध्यात्म के समर्पित जिज्ञासुओं के लिए वैदिक गुरूकुलम पवित्रतम तपस्यास्थल है !……..भारत में अब बहुतायत महामानवों का निर्माण हो रहा है !……एक महामानव अनेकों जीवनों को मधुर ऊर्जा से भर देता है !…….हम अपने इस दैवीय संसार को पुनः मधुर प्रेम प्रकाश से भर देंगे !…. इस युग के महानतम सन्यासी की अकल्पनीय तपस्या का बहुआयामी सुफल मानवता को मिल रहा है ,…यह नित्य बढ़ता ही जाएगा !……..अर्थ मानव जीवन का महत्वपूर्ण अंग है ,…..इसकी शुचितापूर्ण उन्नति बनाए रखना अर्थतंत्र का पवित्र दायित्व है !

अंततः ,…….प्रत्येक परिस्थिति में सत्य का साथ देना सार्वभौमिक मानवधर्म है !……..सत्य के अनेकों स्तर हो सकते हैं ,…..श्रेष्ठतर सत्य अपनाने का विवेक हममें होना चाहिए !……हम इस विवेक प्राप्ति के लिए भगवान् गणपति से प्रतिक्षण प्रार्थना करते हैं !…………………….लोकतंत्र में आलोचना अनिवार्य है,…समालोचना की महान सार्थकता है !…….. लेकिन … आतंकपरस्त कांग्रेस की तरह अकारण आलोचना सुकर्मों को दुःख देती है !……सबको इससे बचना चाहिए !………उन्नत भारत के साथ हमारी धरती का भविष्य उज्जवल है ,…अन्धकारक शक्तियों को मिटाना और मिटाते रहना हमारा सक्रिय संकल्प बना रहना चाहिए !…..पवित्र प्रकाश ही हमारा लक्ष्य रहना चाहिए !…….ॐ शान्ति !………भारत माता की जय !!…………..वन्देमातरम !!!

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