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सत्यमेव जयते

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संवेदना और गन्दगी

Posted On: 14 Aug, 2017 social issues में

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BRD Hospital collage


गोरखपुर का बाबा राघवदास मेडिकल कालेज इन दिनों हमारी संवेदना का केंद्र बना है। हमारी संवेदना तब बहुत गन्दी दिखती है, जब एक मृतक बालक के बुजुर्ग अभिभावक बहुत जोर से रोना चाहते हैं, लेकिन ‘भीड़ कैमरा एक्शन’ प्रभाव की प्रतिशक्ति कदाचित रोकती है। दुविधा में निकली पीड़ादायक चीत्कार भी हमारी हंसी का कारण बनती है। तब हम स्वयं को आत्मारहित खाली खोखला पुर्जा पाते हैं। कभी महाकवि भक्त कबीरदास जी भी अपनी मौज के मरीज बने रहे। कलियुगी सुदामा शायद भगवान् श्रीकृष्ण को बुलाना चाहते होंगे। प्रहलाद, ध्रुव जैसी महान आत्माएं कदाचित अपनी सारी जिम्मेदारी परमप्रभु पर डालकर सो गयी हैं। लेकिन एक स्थिर परमसत्य यह भी है कि वो सतत् जागृत सचेत हैं।  उसके लिए मानवीय जीवन मृत्यु लघुतम विषय हो सकता है। वो परमशक्ति हमसे भिन्न है। उनका दृष्टिकोण भी हमसे भिन्न होगा। अनंत मानवीय मुसीबतों के समापन के लिए मानव देह में उनका अवतरण आवश्यक लगता है। पूर्ण योग के साधकों के लिए आगामी समय अत्यंत महत्वपूर्ण होगा।


महर्षि अरविन्द के कुछ वचनों का उल्लेख आवश्यक लगता है कि अभीप्सा और अनुग्रह के सतत मिलन से पूर्ण योग सिद्ध होता है। भागवत वरदान वेद में ही पूर्ण और शास्वत ज्ञान है। वह समस्त रहस्यमय ज्ञान प्रत्येक मानव में बीजरूप में स्थिर है। आस्तिक पवित्रता से ही उच्चतर द्वार खुल सकते हैं। आध्यात्म क्षेत्र में अपवित्र प्राप्ति का कोई मूल्य नहीं है, फिर चाहे वह समाधि ही हो। यहाँ साधक का सतत् यात्री रहना भी अनिवार्य है। साधकों में अहंकारहीनता प्रथम सद्गुण होना चाहिए। आज का मानव द्विविधि प्रकृति में फंस चुका है। उत्तम प्रकृति की बहुलता हममें सबलता लाएगी। महायात्रियों के लिए ऊंचे शिखर या गहरी खाईं का कोई विशेष महत्व नहीं होता है। परमकृपा पर अटूट सक्रिय विश्वास से प्रत्येक बाधा दूर होती है। भूल भटकाव भी आवश्यक प्रक्रिया बन जाती है। यहाँ समर्पण हमारी आतंरिक पूर्णता की धुरी है। सच्चाई, श्रद्धा, भक्ति, अभीप्सा, सहिष्णुता आदि से यह पुष्पित होती है। आज हम मोहग्रस्त मलिन मानस से युक्त हैं, लेकिन हममें प्रत्येक संभावना सजीव है। हम परमप्रभु से श्रेष्ठता की अनंत सहायता करने की प्रार्थना करते हैं। हम उनके यथायोग्य रूपों में उज्व् करल अवतरण की हार्दिक वंदना प्रार्थना कामना करते हैं।


विषय पर आते हैं। संवेदनाएं सभी में हैं, लेकिन प्रायः यह सुप्त हो जाती हैं। पीलीभीत में एक आदमखोर शिकारी पशु ने दर्जनों इंसानों को मार दिया है। शुद्ध संवेदना उसका शीघ्र अंत चाहती है। संकुचित संवेदना उस पशु से भी हो सकती है। बहरहाल, गोरखपुर के नामी मेडिकल कालेज की घटना की विवेचना जरूरी है। पूर्वांचल में विशेष खतरनाक दिमागी बुखार का प्रतिवर्ष भयानक प्रकोप होता है। यह निरंतर फैल भी रहा है। गोरखपुर के सभी अस्पतालों में बिहार, नेपाल तक के मरीज आते हैं। अन्य मच्छरजनित बीमारियों के बहुतायत मरीजों से सभी अस्पताल प्रायः बेहाल रहते हैं। सबसे दयनीय हालत में व्यक्ति मेडिकल कालेज पहुँचता है। तमाम जिंदगियों को बचाने के साथ यहाँ प्रतिदिन औसतन आठ से बारह मौतों का अभिलेख मिलता है। अगस्त के महीने में यह आंकड़ा बहुत ऊपर तक जाता है। हमारे डाक्टरों में भगवान होने का भयानक मिथ्या अहंकार भी आता है। हमने भगवानों को चढ़ावा चढ़ाने की प्रथा भी पाली है। लालची, भोगी, भ्रष्ट, धूर्त व्यक्ति भगवान डॉक्टर क्या सच्चा इंसान भी नहीं हो सकता है।


मानवता को बीमारियों से बचाना है, तो हमें बाह्य आतंरिक दोनों गंदगियों को मिटाना होगा। इस पूज्य महाप्रयास में स्वामी रामदेव और उनके प्रिय अनुषंगी मित्र आचार्य बालकृष्ण की बारम्बार वंदना है। उन्होंने योग, आयुर्वेद के प्राचीन पवित्रज्ञान को घोर परिश्रम तपस्यापूर्वक संसार को सरलता से उपलब्ध कराया व समझाया है। बीमारियों के भयानक दौर में आज करोड़ों मानव योग आयुर्वेद से निरोगी जीवन जी रहे हैं। योग आयुर्वेद के महाज्ञान से हमारे अन्दर आतंरिक शुद्धि की चेतना जागृत हुई है। स्वदेशी की पवित्र भावना नित्य बढ़ रही है, लेकिन हमारी जड़ मूढ़ता भी बराबर उपलब्ध है।


गन्दगी से मच्छरों समेत अनेकों बीमारियाँ जन्म लेती हैं। हमारे प्रधानमंत्रीजी समेत अधिकाँश राजपक्ष शासन ने हाथ में झाड़ू उठा लिया, लेकिन कुछ राजनीतिक दलों की तरह हमने भी गन्दगी न हटाने का दुराग्रह पाल लिया। भारत अपनी मेधा से कचरा निपटान समेत तमाम गंदगी से निपटने के सार्थक उपाय चाहता है। बाह्य गन्दगी हटाने का निर्णायक काम अब हमें युद्धस्तर पर करना होगा। श्रेष्ठ सरकार का पावन लक्ष्य भले ही पांच वर्ष का हो लेकिन हमें यह काम और यथाशीघ्र करना चाहिए। मच्छरों के रहते मानवता इसी तरह मरती रहेगी। मच्छरों को मिटाने के लिये गन्दगी को मिटाना ही होगा। हमारे माननीय मुख्यमंत्री जी अपने क्षेत्र के लिए सदा संघर्षशील रहे हैं। खतरनाक दिमागी बुखार के खात्मे के लिए योगीजी अवश्य ही पुरजोर प्रयास करेंगे। अपने प्रति उनकी संवेदना को हम सादर नमन करते हैं।


मुख्यमंत्री बनने के बाद चार बार वो इस घटनाग्रस्त संस्थान का दौरा कर चुके हैं। 9 अगस्त को भी उन्होंने मेडिकल कॉलेज का दौरा किया था, तब उन्हें कोई समस्या नहीं बतायी गयी थी। 11-12 अगस्त के 48 घंटों में तीस से अधिक मासूमों की मृत्यु हुयी। सडांध मारते भ्रष्टतंत्र के रोजाना हाल से बेखबर सर्वज्ञ मीडिया जागता है। प्राणवायु की कमी उजागर होती है। आपूर्तिकर्ता को भुगतान में विलम्ब से उसने आपूर्ति बंद कर दी। वैकल्पिक व्यवस्था हुई, लेकिन दो घंटे के कालखंड में प्राणवायु आपूर्ति का दबाव कम हुआ। कालेज प्रशासन व सरकार ने इस वजह से मृत्यु होना अस्वीकार किया है। प्रत्येक की अपनी विवशता होती है, लेकिन मनुष्यता इसे भी स्वीकार करने में है। कुछ नाजुक अस्तित्व इस दौर में भी बिखरे होंगे।


हम अपनी श्रेष्ठ सरकारों से प्रार्थना करते हैं कि आपके महान चुनाव के लिए हम पहली बार गौरवान्वित हुए हैं। यह प्रगाढ़ भावना अत्यंत आतंरिक है, भरोसा बहुत मजबूत है। मानवता के दोषियों को किसी भी हाल में बचना नहीं चाहिए। अस्पतालों में दवा उपकरण सामानों की खरीद बिक्री में बड़ा माफिया काम करता था। डाक्टर, अधिकारी, दलाल, आपूर्तिकर्ता, निर्माता, नेता, सत्ता सब इसके हिस्सेदार थे। अरबों का बजट बंदरबांट का शिकार था। सौ में नब्बे बेईमानों के हिस्से थे। ये अमानवीय वैश्विक माफिया अत्यंत ताकतवर हैं। हमारी श्रेष्ठ सरकार इसे मिटाने का कार्य कर रही है। गंदे, बेईमानों, राक्षसों का प्रयास सदैव सद्कर्म में रुकावट डालने में होता है। गोरखपुर की घटना से घृणित साजिश की भयानक बदबू भी आ रही है।


कांग्रेस के मुखौटों का फ़ौरन मेडिकल कॉलेज पहुंचना और डॉक्टरों को बेगुनाही का अग्रिम प्रमाणपत्र पेश करना, कुछ ख़ास इशारा करता है। मुसीबत के मुख्य वृक्ष, गन्दगी के पैरोकार भ्रष्टाजनों को मनचाहे लड्डू मिल गए या बनाए गए। कुत्सितता में डूबे नालायक अमानुषों ने मिलकर साजिश रची है। लालच, भ्रष्टाचार की लत इसका मुख्य सूत्र है, जुड़ने वाले तमाम होंगे, नीचे से ऊपर तक भ्रष्ट मण्डली एक है, यह व्यवस्थागत गन्दगी अत्यंत भीषण है। सरकार की लोकप्रियता को बट्टा लगाना, सरकार में फूट डालना और गोरखपुर उपचुनाव प्रभावित करना इनका तात्कालिक लक्ष्य हो सकता है। भारत में सुराज की संभावना से ही इनको पसीने आते थे, अब शक्तिशाली सुराज में इनका खाना-पीना निकालना सब बंद होगा। भ्रष्टतम, अंधकारी, अमानवीय राजनेता पुनः भारतद्रोह पर आमादा हैं। अमानवीय, अतिलोभियों का भयानक सर्वनाश सुनिश्चित है।


बहरहाल, आम जनता का योगी सरकार में भी अटूट विश्वास है। छोटे से कार्यकाल में यह विश्वास बहुत मजबूत हुआ है। ये देश-समाज के लिए कुछ करने वाले समर्पित निडर सेनानी हैं। इस दुर्घटना से संवेदनशील सरकार कुछ परेशान दिखी। श्रेष्ठता को अभी बहुत प्रसार पाना है। श्रेष्ठ लक्ष्यों के लिए श्रेष्ठजनों का पूर्ण एकजुट सतत प्रयत्नशील रहना आवश्यक है। संभावित स्वार्थ अहंकार की जगह समर्पण समन्वय स्थापित होना चाहिए। दलालों की हमें परवाह नहीं करनी चाहिए।


भ्रष्ट अधिकारियों के लिए रेगिस्तान जैसे निर्जन स्थानों पर विशेष कारागारों की व्यवस्था करनी चाहिए। अस्पतालों की उत्तम आपूर्ति के लिए भ्रष्टाचार रहित विशेष व्यवस्था आवश्यक है। अस्पतालों से अधिकाधिक मानवसेवा होनी चाहिए। मेडिकल कालेजों में बड़े डाक्टरों के दर्शन अक्सर दुर्लभ रहते हैं। अधिकाँश अपने निजी लाभों में व्यस्त रहते हैं। सभी मानवों, विशेषकर डाक्टरों ने मानवता की सेवा के लिए जन्म लिया है। हमें विशेष ऊर्जा व पवित्रता के साथ समर्पित सेवा करनी चाहिए। हम विश्वास करते हैं कि इस दुखद घटना की सार्थक जांच होगी। स्वास्थ्यतंत्र में व्याप्त घोर भ्रष्टाचार का श्रेष्ठ निवारण होगा। समर्थ श्रेष्ठ सत्ताएं मिलकर उत्तम निदान करेंगी। गन्दगी बहुत है, गन्दगी में फंसे देश को निकालने के लिए सब श्रेष्ठजनों को मिलकर कमर कसनी चाहिए। संवेदनाओं के समापन से बहुत पहले हमें प्रत्येक गन्दगी मिटा देनी चाहिए। भ्रष्टाचार हमारी प्रमुख गंदगी है।

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