युवामंच

सत्यमेव जयते

59 Posts

20 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8098 postid : 1345772

अहानंद !

Posted On: 11 Aug, 2017 में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आदरणीय मित्रों ,…सादर प्रणाम !

आदरणीय ,माननीय ,पूज्यनीय , श्रेष्ठ मानव, उत्तम राजनीतिज्ञ श्रीमान वेंकैया नायडू जी का उपराष्ट्रपति बनना भारतीय इतिहास का महान पड़ाव है !………इस घटना से भारतीय आत्मा को अहानंद जैसा अनुभव मिला है !………..भारत में शीर्ष संवैधानिक पदों पर श्रेष्ठ भारतवर्ष के प्रति पूर्ण समर्पित,… कर्मठता के प्रतिमूर्ति त्यागी तपस्वी कर्मयोगी महात्मा विराजमान हो चुके हैं !……..उनका पवित्र लक्ष्य मानव सभ्यता के लिए अत्योत्तम है !…….अहा कैसा अद्भुत आनंद है !………अनेकों महान मानवों शूरवीर त्यागियों के परमपरिश्रम से आज भारतीय जनता पार्टी संसार को श्रेष्ठ पथ पर आगे बढ़ाने में सक्षम है !……..हमारा वर्तमान संसार भी श्रेष्ठजनों से भरापूरा है !………..यद्यपि संसार में व्याप्त पीड़ाओं से कोई इस अहानंद में डूब नहीं सकता है ,……….अनेकों मानव पिंडों खण्डों के बावजूद हमारी समस्याएं सबकी सांझी हैं !………हमारा अज्ञात अदृश्य दानवी जाल ‘अज्ञान’ मानवता को बहुत कष्ट दे रहा है !………यद्यपि यह झीना मिथ्याजाल अत्यंत कमजोर है ,…………..लेकिन यह तीव्र चुभन वाला है ,…….दुर्भाग्य से हम बहुतायत इसके आदी भी हो चुके हैं !………हमें पूर्ण श्रद्धा विश्वास समर्पण से एकदूसरे का हाथ पकड़कर तेज सधे क़दमों से चलते रहना होगा !……….प्रत्येक परिस्थिति में ईश्वर हमारे निश्चित सहायक हैं !………कालगति से संसार चलाने वाले परमपिता परमेश्वर सबकी बारी बारी से परीक्षा लेते हैं !…..हम मानें या न मानें ,…जानें या न जानें !……हम सब उनके प्रिय लाडले हैं या …हो सकते हैं !…….उनकी तरफ से हमारा सम्बन्ध हम पर ही निर्भर है !…………महानतम परमेश्वर को मानवता बारम्बार प्रणाम करती है !……भारतवर्ष पुष्पउद्यान की भाँति अपने परमस्वामी की पूर्णसमर्पित सुगंधसेवा का परमानंद अवश्य पायेगा !………….हमारी जटिल कर्मगति अपार है ,….यही ऊबड़-खाबड़ मानवता की आधारगति भी है !………मलिन प्रदूषित हो चुकी धरती के पुनः सुगन्धित होने की प्रबलतम संभावना है !…….रहस्यमयी परमपिता की सर्वत्र गुप्त व्याप्ति रहती है !……फिलहाल इस राजनैतिक अहानंद के लिए हम परमपिता के अतिशय कृतज्ञ हैं !…………

आज भारत को सम्पूर्ण संवैधानिक पूर्ण स्वराज्य मिला है !…….संसार एक गाँव कुटुंब है ,….हम सबको नमन करते हैं ,…..धरती के इस प्यारे विशाल परिवार को पूर्ण सद्भावी समर्पित नेतृत्व मिला है …हम संसार के साथ पवित्रता से मिलकर चलने के आग्रही हैं !………पवित्रता से पवित्र सुखदायी उन्नति मिलती है !……..भारत में आज लोकतंत्र की पूर्णता का गुप्तपर्व है !……..आज सामान्य परिवार से आये मानवता के लिए वरदान परमपूज्य श्री नरेंद्र भाई मोदीजी हमारे प्रियतम प्रधानमंत्री,.. समर्थ कार्यकारी मुखिया हैं !…….. अतिसामान्य परिवार से आये पूज्य रामनाथ कोविन्दजी हमारे सरल संवेदनशील सद्ग्यानी समर्थ संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष हैं !………..नए उपराष्ट्रपति आदरणीय वेंकैय्या जी के बारे में कहना ही क्या !…..बचपन में मातृप्रेम से वंचित हो चुके कृषक बालक ने क्या कभी इस अवस्था का सपना देखा था ,….लेकिन उन्होंने कलुषता के एक चरम पर संघर्ष पथ का वरण किया ,……पवित्र उद्देश्य के लिए बनी भारतीय जनता पार्टी को उन्होंने अपनी माँ बनाया ,…अपने त्याग परिश्रम सेवा ज्ञान समर्पण सामर्थ्य आदि सद्गुणों से उन्होंने यह महान स्तर प्राप्त किया है !…,…उनके लिए भी शब्द कम पड़ जाते हैं ,…..वो अद्भुत दक्षता वाले ऊर्जावान उज्जवल व्यक्तित्व हैं !….उनमें निराला आकर्षण है ,..कुशल लुभावनी वाकपटुता है !……..भागवतभक्त भारतवर्ष उनको महानंद का अनुभव दिलाने के लिए भी नमन करता है !……..

… पूज्यनीया सुमित्रा ताई हमारी लोकसभा की शिखरशालीन अध्यक्षा हैं !…….दुष्टता पर आमादा बेईमान विपक्ष को भी मुस्कराते हुए संभालती हैं !……….इस महान अवसर पर हम आदरणीया सुमित्राजी को भी वंदन करते हैं !……..वैसे तो आज विपक्ष पर कुछ कहने को मन नहीं करता ,…लेकिन दायित्व कुछ प्रेरणा देता है ,…प्रत्येक का अपना महत्त्व है !…….किसी भी लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का प्रत्येक सदन मानवहितकारी सार्थक स्वच्छ चर्चा के लिए होता है !…..व्यर्थ शोर तो पूर्णस्वार्थी कुत्ते सियार भी नहीं मचाते हैं !……..प्रत्येक यात्रा पथ के दो मुख्य किनारे होते ही हैं !……..मानव यात्रा का स्वच्छ संतुलन हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है !……..राजनीति का भी कोई किनारा गंदगीयुक्त नहीं रहना चाहिए !……….गन्दगी फैलाने वाले अपनी दुर्दशा न्यूनता के जिम्मेदार स्वयं होते हैं !……यदि हमने अज्ञान ,लोभ मूढ़तावश पाप किया तो आने वाले यात्रियों को और कष्ट होगा !……..पाप के बढ़ते बोझ से मानवता और बुझ सकती है !…………..परमकृपा हमें पवित्र सुख प्राप्ति का उज्जवल मार्ग दिखाती है !……..गुरुतत्व परमकृपा से मेल में परमसहायक है ,…….भारत सनातन काल से अखंड अनंत गुरुतत्व से युक्त है !……इसीलिए …..भारत भगवत्ता के महान समर्थ सेवक ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ भगवा झंडे को गुरुतत्व का प्रतीक मानता है !……….पवित्रतम भगवा रंग मानवता को महान ऊर्जा देता है ,….किसी भी रूप में इसका विरोध अपमान स्वयं से भी अन्याय है !……..सार्थक व्यवस्था प्रत्येक अन्याय का दंड देने को विधिपूर्वक बाध्य है !……….हमारे सामने भगवा पवित्रता की समर्पित सेवा का महान सुअवसर भी है !…………बहरहाल राजनैतिक विपक्ष को सद्ग्यानी, उच्च आचरण से युक्त होना चाहिए !…..मर्यादित अहंकारहीन उच्चभावना से यथायोग्य मानव सेवा में सहयोगी बनना चाहिए !……..जाने अनजाने सब यात्रा के सहयोगी ही होते हैं !…..प्रत्येक अस्तित्व का एक कारक है ,…एक कारण है ,…एक लक्ष्य है !……..हमें भीतरी बाहरी असुरता को मिटाने का भरसक प्रयत्न करते रहना चाहिए !…….संसार में अभिव्यक्त हो चुके निर्णायक उत्तम महासंयोग का असहयोग करने वालों को अपने पाप का परिणाम भोगना होगा !…………अंततः हमसब किसी की कठपुतली मात्र हैं !…….अभी हमें एक और कालक्षण की प्रतीक्षा सतत बनी रहेगी !……….प्रत्येक निर्णायक देवमुहूर्त से पहले परमपिता हमसे अपने अर्जित बल पर यात्रा करने की रोमांचक विवशता भी देते हैं !……..मानवता की महायात्रा के प्रत्येक पड़ाव से पहले एक लम्बी तपस्या अनिवार्य नियम है !…………पूर्णत्व के अनंत पहलू हैं ,…पवित्र पूर्णता की अनंत उंचाई है ,….ऊंचाई पर विराजित मानवता को विशेष ईश्वरीय ज्ञान रखना चाहिए ,…… कभी किसी में दोष अभिमान पैदा होने से पहले ही स्वनिवारण होना चाहिए !……संतुलित प्रकृति हमें आत्मा से सहज ही मिला सकती है ,……..शुद्ध आत्मा ईश्वरीयज्ञान युक्त गुरुतत्व की सहायता से परमेश्वर की आनंददायी शरण में जा सकता है !…..इसीलिए …हम परमेश्वर से भी पहले गुरु को प्रणाम करते आये हैं !……भारत का वर्तमान शीर्ष नेतृत्व गुरुता सहित भगवत्ता धारण करने में समर्थ है !…….

प्रत्येक व्यवस्था में मुक्त जनसंचार माध्यम उन्नति की अनिवार्य आवश्यकता है ,…..वर्तमान भारतीय सन्दर्भ में मुक्त जनसंचार पर्याप्त ऊंचे शिखर पर है ,…. यद्यपि इसमें भी बहुतायत कुरूपता अभद्रता गन्दगी है ,..लेकिन ….समाचार संसार भी मानवता को सनातन वरदान हैं !……..हमें इसमें भी पुनः शुचिता पवित्रता लाने का प्रयास भी करना चाहिए !…..तमाम अच्छाइयों के साथ इसमें भी सर्वत्र बहुत बुराइयां व्याप्त हैं !……..NDTV इंडिया नामक  एक समाचार चैनल का उल्लेख आवश्यक लगता है !…….इनका संघ भाजपा मोदी से विशेष दुराग्रह लगता है !………भारत ने इनका नीच कांग्रेसी झुकाव भी स्पष्ट देखा है !……….यद्यपि ये सच दिखाने का दावा करते हैं ,….कुछ दिखाते भी हैं !…..लेकिन इनके चिकने सत्य की पतली बनावटी परत के नीचे इनकी भयानक अज्ञानता मूर्खता साफ़ दिखती है !……पत्रकारिता विचारों का व्यापार नहीं है !…….निष्पक्षता न तो चाटुकारिता है और न दुराग्रही शत्रुता है !………….शायद कर्मगति के किसी कारण से कुछ लोगों में किसी के प्रति अनायास ही विशेष दुराग्रही भाव पनप जाता होगा !……..हमें इनका भी सप्रेम आदर स्वागत अभिनन्दन करना चाहिए !………श्रेष्ठ सरकार के लिए ये अच्छे निंदक हो सकते हैं !………सरकार को इनकी जनहितैषी बातों को गंभीरतापूर्वक सुननी चाहिए !…..वैसे इनके कुछ प्रस्तोता कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय भी है ,….लेकिन ……. इनकी कुंठित गंभीरता का आलम यह है कि,….. जब भारत अहानंद में डूबने तैरने की तैयारी कर रहा था ,……तब ये एक नए मोबाईल के बाजारू सद्गुण प्रसारित कर रहे थे ,……ये अपनी तथाकथित सत्यनिष्ठा के बलपर फिल्मों ,..संपत्तियों ,…शेयर ब्रांड ,.गाड़ियों आदि बाजारों को प्रभावित करने का कमाऊ प्रयास भी करते हैं !,……….वैसे इन्होने अपनी सीमा में बाजारू और सभ्य धाराओं का कामचलाऊ संतुलन बनाया है !…..इसके मालिक प्रणब राय भी कलुषता में लिप्त व्यक्ति हैं ,…….किन्तु उनमें कुछ विशेष कलाकारी अवश्य है !…….निरुत्तर दुराग्रही कुंठित पत्रकारिता अक्सर पीड़ा फैलाती है !……सबको समुचित सावधान रहना चाहिए !

….हमें याद रखना चाहिए कि हम किस विशेष काल में हैं ,….इस पड़ाव में भयंकर प्रलयंकारी बवंडर के रूप में मानवता की शत्रु लोभी आसुरिक शक्तियां हम पर आक्रमण करने को प्रयत्नशील हो सकती हैं ,….यद्यपि कुचेष्टाओं का सर्वनाश सुनिश्चित है ,…….लेकिन … प्रत्येक संघर्ष हमारी मानवता की परीक्षा भी होता है !……….हमें किसी भी विरोधी शक्ति का रंचमात्र यंत्र बनने से बचना होगा !……..हमें सावधानीपूर्वक प्रयत्नपूर्वक गहन सद्ज्ञान ग्रहण करना चाहिए !…………..हम सबको धवल सत्यनिष्ठा प्राप्ति की प्रार्थना करते हैं !…….सबको और श्रेष्ठ स्तर प्राप्त करने की इच्छा और प्रयत्न पालते रहना चाहिए !…….ज्ञान सर्वोच्च साधन है ,…..महान आत्मज्ञान के लिए सद्भावनायुक्त सक्रिय समर्पण सर्वश्रेष्ठ पथ है !……हमें इसी पथ का पालन करना और करते रहना चाहिए !…..

अंततः वर्तमान भारत अपने पूज्य शीर्ष राजमहात्माओं को पुनः पुनः प्रणाम नमन वंदन अभिनन्दन करता है !……….भारतवर्ष अपने समस्त वासियों का प्रेमपूर्वक अभिनन्दन करता है !….अपने मित्रों प्रेमियों को सादर सप्रेम नमन करता है !…..इस अहानंद से महानंद तक जाने की यात्रा भी अवश्यमेव अद्भुत होगी !…….मूर्खता में फंसी भारतीय मानवता ‘एकात्म मानववाद’ की मधुर प्रेमशक्ति से उन्नत उज्जवल होगी !……………………. प्रत्येक भारतीय नागरिक को अपने पूर्ण सामर्थ्य शुचिता सजग समर्पण के साथ इस महायात्रा का यथायोग्य दायित्व लेना होगा !………..यह ज्ञान भी हमारे लिए वरदान है कि ,……हमें प्राप्त होने वाला प्रत्येक फल हमारे कर्मों पर ही आधारित होता है !…….इसलिए परमपूज्य प्रधानमंत्रीजी का नया मन्त्र अत्यंत सामयिक शक्ति से युक्त है ,…… ‘हम करेंगे और करके रहेंगे’ !……अहानंद से महानंद तक पहुंचना हमारा व्यक्तिगत सामूहिक लक्ष्य होना चाहिए !….…ॐ शान्ति !……भारत माता की जय !!………..वन्दे मातरम् !!!

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading ... Loading ...

0 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments


topic of the week



latest from jagran