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सत्यमेव जयते

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प्रिय 'ली शाओबो' !

Posted On: 24 Jul, 2017 में

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आदरणीय मित्रों ,….सादर प्रणाम !

सच्चे, साहसी, मानवता प्रेमी लोकमानव ‘ली शाओबो’ की मृत्यु के समाचार ने ह्रदय में कांटे जैसी चुभन पैदा कर दी !………मूढ़ता मायाजाल मूर्खता में यह चुभन उपेक्षित सी पड़ी रही ,……….फिर आदरणीय श्री शंकर शरण जी का लेख पढने को मिला ,……….उच्च ज्ञानी शिक्षक ने क्रूर कायर बेईमान भयभीत चीनी सत्ता को करारा तमाचा सा मारा है ,……हम मूर्ख आम मानुषों के साथ उन्होंने संसार के सजग बुद्धिजीवियों और अतिशय सजग राजनैतिक वर्ग को कर्तव्यबोध भी कराया है !……….

‘ली शाओबो ’………पता नहीं हममें से कितने लोग उनके नाम का शुद्ध लेखन उच्चारण कर सकते हैं ,……लेकिन उन्होंने मानवता के लिए जिस तरह का संघर्ष किया वो आधुनिक युग में अद्वितीय है !……..अपनी जिस ताकत के बलपर ड्रैगन अपने सभी पड़ोसियों को डराता है या डराना चाहता है …..वो ताकत शाओबे के मृत शरीर की चमड़ी से भी अधिक कमजोर है !……पापी ड्रैगन भय दिखाकर दुनिया के साथ अपने सजग नागरिकों का उत्पीड़न भी करता है !………….शाओबो सच्चे नागरिक थे ,…..उन्होंने चीनी संविधान के अनुरूप आम चीनियों को बोलने-लिखने, सोचने-समझने की इच्छा पाली थी !……साहसी शाओबे मतदान का आम अधिकार चाहते थे !……….इस युग में कितना कारुणिक हास्य उत्पन्न होता है जब हम यह सोचते हैं कि तमाम चीनी नागरिक ली शाओबो के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं !……..लेकिन नोबेल पुरस्कार विजेता मानव को दुनिया उपेक्षित करे तो हमें समझना होगा कि ……दुनियादारी की हमारी नाव अत्यंत भयानक कीचड़ में फंस चुकी है …… लोभ का अथाह दलदल मानवता को रोके खड़ा है !………….आज तमाम तथाकथित मानवाधिकारी शक्तियां अपनी तुच्छ लोभपूर्ति हेतु दुष्ट अन्यायी अत्याचारी अहंकारी सत्ता की साथी बनी हैं !

‘ली शाओबो’ उन महान योद्धा संतमानव का नाम है जिन्होंने सद्भावनापूर्ण आत्मघर्षण से भरकम बर्फ में अक्षुण्ण अग्निशिखा जला दी है !…………व्यवस्थित तानाशाही चलाने वाली चीनी सत्ता ने उनको नोबेल पुरस्कार गृहण नहीं करने दिया ,……कैसर की अंतिम अवस्था में भी चीन से बाहर नहीं जाने दिया !!……….उनको मृत्युपूर्व अंतिम सन्देश तक नहीं देने दिया गया !…………बहरहाल होनी को कोई ताकत रोक नहीं सकती है …….घृणाहीन ,अशत्रु मानव अपना कर्तव्य पूरा कर गया है ,…..अब हम शेषों का कार्यसमय जारी है !………बेचैन आम चीनियों का दुर्भाग्य यह है कि वो अपनी पीड़ा को पहचानते नही हैं !…………भौतिक चकाचौंध में अंधे हमारे मानव समूह बस एक दूसरे से टकराना जानते हैं !……….खैर …………चालबाज चीनी सत्ता को समझ लेना चाहिए कि आतंक के बल पर राज करने वालों का भयानक पतन सुनिश्चित होता है ,…….स्वघोषित अधर्मियों को भी समझना चाहिए कि ….इस संसार में नियति नामक सनातन सक्रिय शक्ति है ,…वह सबका यथासमय उपयोग करती है !……………संसार में जीवन मरण सामान्य घटना है ,….लेकिन प्रत्येक परपीड़ा का फल सुनिश्चित है !……….शायद चीनी सत्ता अब भी प्रायश्चित कर सकती है ,……विशालकाय क्रूर कैद बने चीन को भी महान लोकतंत्र में परिवर्तित किया जा सकता है !……… ‘ली शाओबो’ मानवता के सुगन्धित पुष्प थे ,……..कोई शक्तिशाली सत्ता हवा को कैद सकती है लेकिन सुगंध को नहीं !………. चीन को अमानुषिक हठधर्मिता कुंठा क्रूरता त्यागकर लोकतांत्रिक संसार से प्रेमपूर्वक सत्यनिष्ठा खुलेपन से जुड़ना होगा ,…..अपनी निर्मम आकांक्षाओं को त्यागना होगा ,…आत्मपरिवर्तन करना होगा !…….. या फिर …………………मानव इतिहास गवाह है कि ……ठोस पहाड़ जैसे अधर्मी अहंकार भी चूर चूर होते हैं ! ………हम चीनी सत्ता को सद्बुद्धि की कामना करते हैं !……

‘ली शाओबे’ के संघर्ष का अर्थ बहुत गहरा था ,….यह अर्थ मानवता को आर्थिक आतंकवाद से निकालने की राह भी दिखा सकता है !…….. ‘अर्थ’ अवश्य ही मानवता की आवश्यकता है लेकिन … वह अर्थलाभ निश्चित हानिकारक है जो पीड़ा पैदा करता हो !…………संसार को अतिशय भोगवृत्ति की जगह संयमी उपभोग को अपनाना होगा ! ………..प्रगतिशील आम मानवता को अलोकतांत्रिक अमानवीय चीनी सत्ता का बहिष्कार करना चाहिए !…….चीनी उत्पादों का बहिष्कार करना चाहिए !……..शायद हममें से कोई शाओबो को सच्ची श्रद्धांजलि नहीं दे सकता है ,……हम मूर्ख हैं ,…. क्रूरता के भागीदार हैं ,…..फिर भी कुछ कर्तव्य तो निभा ही सकते हैं !……..प्रत्येक धार्मिक मनुष्य को दुष्ट दानवी सत्ताओं के पतन की आत्मीय प्रार्थना करनी चाहिए !…….वो जितनी दुष्टता अधर्म करेंगे उतना शीघ्र पतनप्राप्ति करेंगे !…….यही शाओबो को हमारी वास्तविक श्रद्धांजलि होगी !…

‘प्रिय ली शाओबे’…………आपने चीनी मानवता के लिए महान संघर्ष किया है ,…….आपने अपना रुग्ण कैदी शरीर छोड़ा है ,…..आपका लक्ष्य नहीं छूटने वाला है !………जिन महान बीजों को आप चीनी भूमि में दबाकर गए हो वो कठोर पत्थरों का सीना चीरकर यथाशीघ्र उपजेंगे ,….आपके पुष्प दुर्गंधित चीन में पुनः लोकतांत्रिक सुगंध फैलायेंगे ,………आप उसी भूमि पर पुनःजन्म लोगे जिससे आपको अथाह प्रेम था ,…..तब आपकी शक्तियां अधिक होंगी ,………परिस्थितियां अलग होंगी ,……शायद आपकी तपस्या का पूर्ण सुखान्त तभी फलित होगा !…………………आपको शतशत नमन !………..आपको हार्दिक श्रद्धांजलि ….. ‘प्रिय शाओबे’ !………..…………ॐ शान्ति !!!

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