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सत्यमेव जयते

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पर्यावरण !

Posted On: 6 Jun, 2017 में

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आदरणीय मित्रों ,….सादर प्रणाम !

दुनिया ने फिर पर्यावरण दिवस मनाया ,……नित्य बिगड़ते पर्यावरण के बीच तरह बेतरह के प्रयास भी हो रहे हैं !………..हम चिंतित तो हैं लेकिन हमारी चिंता काफी कुछ नकली लगती है !…….पर्यावरण जीवन का मूल आधार है !….कितना रोचक लगता है कि …..हम अन्य ग्रहों पर जीवन खोजने की लालसा में भी अपने जीवन को हानि पहुंचाते हैं !……..बहरहाल ….इस पर्यावरण दिवस पर सबसे बड़ा समाचार अमेरिका का अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण समझौते से पीछे हटना है !….विश्वशक्ति का पीछे हटना संसार को संदेहित करता है !………प्रत्येक वस्तु बात निर्णय के कई पहलू होते हैं ,..लेकिन सार्वभौम सत्य यह भी है कि धन जब दिमाग में बस जाय तो पाप हानि की संभावना बढ़ती है ,….एकांगी सोच से मानवता अधूरी होती है ,….आज अधिकाँश मानवता इस विकलांगता की शिकार है !…..अमेरिका के माननीय राष्ट्रपति महोदय को अपने पूर्वजीवन की छाया से उभरना चाहिए !……………..कोई व्यक्ति देश समुदाय पर्यावरण के प्रभाव से मुक्त नहीं है ,……जिम्मेदारियों से भागने वालों को नेतृत्व का नैतिक अधिकार नहीं मिलता है !……..बहरहाल ….

भयानक परिस्थितियों के बीच भी भारत अपने पर्यावरण को संभाल सकता है ,…..हमें परिवहन के प्रदूषित साधनों पर नियंत्रण पाना होगा !……..हमारे पुराने बिजलीघरों को उन्नत सुपर क्रिटिकल तकनीक में बदलना होगा !…..हमें कबाड़तंत्र में स्वच्छ संभावनाएं अपनानी होंगी !……स्वच्छ ऊर्जा ,..विशेषकर सौर ऊर्जा के क्षेत्र में भारत को व्यापक गहन शोध करना होगा ,…………लगभग पूरे भारत में विलायती बबूल यूकेलिप्टस बहुतायत हैं ,…….इनकी जगह हमें पीपल बरगद नीम पाकड़ आदि बहुमूल्य वृक्षों को बहुतायत लगाना होगा !………..ईश्वर कृपा से ये आसानी से शीघ्र वृद्धि पाते हैं !…………लेकिन .. पांच जून को भारत में वृक्षारोपण का कोई औचित्य नहीं दिखता है ,……..वृक्षारोपण यथासंभव कभी भी हो सकता है लेकिन त्यौहार के रूप में हरियाली तीज सर्वश्रेष्ठ समय है !……….हमारे महान पूर्वजों ने प्रत्येक त्यौहार को सुवैज्ञानिक विधि से नियोजित आयोजित किया है !…………हमारी संस्कृति पीपल बरगद नीम नदी धरती पहाड़ गाय आदि समस्त प्रकृति ब्रम्हांड की पूजा सिखाती है ,…….बाजारवादी बुद्धि संस्कारों के फलस्वरूप हम क्रियाकर्म करते हुए भी मूलभाव से भटके हैं !…….गौघृत से यज्ञ करने से पर्यावरण को महान शुद्धि ऊर्जा मिलती है !…………

मांसाहार से पर्यावरण को बहुत हानि है !………..शाकाहार सात्विकता से मानवता को आभ्यांतर शुद्धि मिलती है !…………. हमारा मानवीय पर्यावरण भी अहंकारी प्रदूषण का शिकार है ,…..राष्ट्रऋषि की सच्ची उपाधि से विभूषित हमारे पूज्य प्रधानमंत्रीजी के पापी विरोधी अपने प्रदूषण को फैलाने का हरसंभव प्रयास कर रहे हैं !………अतृप्त अहंकार मानव को सत्यद्रोही रावण बनाता है ,…उसकी नियति सब जानते हैं !……….खैर ..

महाराष्ट्र के साथ मध्यप्रदेश के कुछ किसान उग्र आन्दोलन पर हैं !……यद्यपि अधिकाँश किसान सरकार से सार्थक वार्ता के बाद आन्दोलन से अलग हो गए हैं ,….फिर भी उग्रता उद्दंडता के बूते आन्दोलन का प्रभाव दिखता है ……प्रश्न उठता है कि ….कोई किसान अपने उपजाए दूध अन्न फल सब्जी को कैसे नष्ट कर सकता है !!……….. सच्चा किसान हर हालत में अपनी उपज बचाता है ,….मजबूरी में दूध का खोया बनाता है !……..लाचार कृषक पीड़ा आक्रोश प्रकट करते हुए अपनी सब्जियों को मुफ्त बाँट देता है !………..लेकिन यह नया भारत है ,……यहाँ श्रेष्ठता के कुत्सित विरोधी राजनेता अपनी स्वार्थसिद्धि हेतु बेहिचक घिनौने विरोधसाधन अपनाते है !……कुछ दिन पुराना चित्र आँखों में पुनः सजीव हो जाता है ,…….दिल्ली में जंतर मंतर पर तमिलनाडु के मोटे ताजे थुलथुल ‘गरीब’ किसानों ने मुंह में प्रयोगशाली चूहों कीड़ों को रखकर प्रदर्शन किया था !……आधे घंटे बाद सब पांच सितारा रेस्तरां का भोजन जीमते पाए गए थे ,…..पापी प्रायोजकों ने किराए के कलाकारों को किसान बना दिया था !…….यह कृत्य जीएम फसलों के समर्थन में भी हो सकता है !…………..बहरहाल,.. महाराष्ट्र के किसान वास्तव में ज्यादा दुखी हैं ,……लेकिन कृषक कभी भी अपना धैर्य नहीं खोता है ,…..हरामखोरों की अधीरता समझी जा सकती है !……..घटिया रूप में चल रहे इस आन्दोलन के पीछे खाऊ राजदलों की पूरी शह समर्थन है !……..हरामपंथी कांग्रेस और उसके लोलुप लगुवे भगुवे अपने पूर्ण सर्वनाश तक इसी तरह भारत का खून चूसते रहेंगे !…………….कालेधन पर होते प्रहारों से ठाकरे कंपनी भी कांग्रेसी जुबान बोलने लगी है !………हम जानते हैं कि भारतीय किसानों की दुर्दशा का जिम्मेदार कौन है ?…….कुकर्मी कांग्रेस यूं ही नहीं मृत्युशैय्या तक पहुंची है !………शरद पवार लम्बे समय तक कृषि या इससे सम्बंधित विभागों के मंत्री रहे हैं ,….महाराष्ट्र ज्यादा जानता होगा कि उन्होंने खाने पचाने के अलावा क्या क्या किया !………कृषक समाज को दलालों ठगों ठेकेदारों से बचना चाहिए !………. देश प्रदेश में श्रेष्ठ परिश्रमी सरकारें है ,…….हम सबको श्रेष्ठ परिणामों का ठोस धैर्यवान विश्वास है !………अपने माननीय मुख्यमंत्रियों से हम किसान किसानी के पक्ष में यथोचित समाधान करने की विनम्र विनती करते हैं !………किसी भी आन्दोलन में हिंसा लूट आगजनी उद्दंडता करने करवाने वाले अपराधियों पर कठोर कार्यवाही बहुत आवश्यक है !………..वैसे …….कानून के हाथ लम्बे होने के साथ सुस्त भी होते हैं ,..अपराधी ज्यादा चुस्त होते है !….जलेबी जैसी न्याय प्रक्रिया भी अक्सर अपराधियों की सहायक बन जाति है ,.. …..अन्यथा …..केवल गांधी पवार ठाकरे परिवारों की काली कमाई से ही पूरे देश के किसानों का आर्थिक उद्धार हो सकता है !……….. सभी खाऊ कुनबों का काला माल राष्ट्रधन बना तो प्रत्येक आर्थिक उन्नति निश्चित है !……..हमारी समर्थ राष्ट्रभक्त सरकार इस दिशा में तेजी से प्रयासरत है ,…….हमारे जांच दलों को पर्याप्त प्राथमिक सफलताएँ भी मिल रही हैं !…..आखिरकार किसी का कुछ नहीं बचेगा !……..बेईमान कुनबों की ‘राजनैतिक बदले’ वाली तोता रटंत देश समझता है !……..एकजुट मायावादी लोग फूट डालकर राज करने के लिए साजिशें कर रहे हैं !…….सहारनपुर की हिंसा इन्ही मायावादियों के पाप का परिणाम है !…….प्रत्येक पक्ष में इनकी घुसपैठ लगती है !……..हमें याद रखना चाहिए कि हर पाप का फल हमें भोगना पड़ता है !…..

भ्रष्टाचारियों पर कड़े कानूनी प्रहार अनिवार्य हैं ,..अब भ्रष्टाचार से समझौता नहीं हो सकता है !…………देश ने बेईमानों को सार्थक सबक सिखाने के लिए ही पूज्य मोदीजी को प्रधानमंत्री बनाया है !……..वैसे आज भारत में बेईमानी का आलम खौफनाक है ,……..ईमानदारी का झाडू उठाने वाले अरविन्द केजरीवाल स्वयं भ्रष्ट बेईमान नकारा सिद्ध हो चुके हैं !……वो भाई भतीजावाद के स्टार प्रचारक हैं ,….. अपने भ्रष्ट हवाला मंत्री का पुरजोर नाजायज बचाव करते हैं !………..ईमानदारी का ताजा झंडा उठाये अपने पूर्व मंत्री विधायक पर विधान सभा में उनके विधायक ही हमला करते हैं ,…… मुखर अहिंसावादी केजरीवाल मौन साधे रहते हैं !…….इससे सिद्ध होता है कि यह आम मानव भी अपनी द्विविधि प्रकृति के बलपर मानवीय भावनाओं के सहारे मात्र अपनी महत्वाकांक्षा पूरी करना चाहता है !……….भारत को नौटंकीबाज केजरीवाल और भ्रष्ट आम आदमी पार्टी से अब कोई उम्मीद शेष नहीं है !…….राजनैतिक प्रशासनिक पर्यावरण शुद्ध करने की हमारी प्रत्येक आशा भाजपानीत मोदी सरकार में सविश्वास रोपित है !…………हम इसे पल्लवित होते देख रहे हैं !….

कृषि पर ही आते हैं !……..किसानों की दुर्दशा का मुख्य कारण लगातार मंहगी होती रासायनिक खेती है !…..यह पर्यावरण के लिए भी अत्यंत हानिकारक है !…….इसका निदान पारंपरिक समृद्ध गौ आधारित जैविक खेती है ,……हमें गौवंश को पुनः कृषि का आधार बनना होगा !…….छोटी होती जोतें और घटता पानी और बड़ी समस्यायें है !……..हमारी श्रेष्ठ सरकार बहुत लगन से कृषि उत्थान के लिए प्रयासरत हैं !………हमें भी आगे बढ़कर सहयोगी प्रवित्ति अपनानी चाहिए !……आज अधिकाँश किसान नेता संगठन किसानी से दूर रहकर राजनैतिक दलाली में जुटे हैं !…….. कुछ समर्पित लोग/संगठन मिलकर श्रेष्ठ सृजनात्मक कार्य भी कर सकते हैं !……..पूज्य पतंजलि संस्थान इस दिशा में भी सफलतापूर्वक महान कार्य कर रहा है ,…..तमाम अन्य भारतभक्त व्यक्ति संस्थाएं भी इस दिशा में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं ,….सबको मिलकर मजबूती से महान दायित्व निभाना होगा !………..हमें एक महत्वपूर्ण बात याद रखनी होगी ,……श्रेष्ठतम भारतीय कृषि लोभी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मकड़जाल में बुरी तरह फंसी है ,…….इससे निकलने के लिए स्वच्छ राजनैतिक इच्छाशक्ति के साथ प्रबल जनभागीदारी की अत्यंत आवश्यकता है !……..कार्यरत श्रेष्ठ मोदी सरकार अबतक की सर्वश्रेष्ठ सरकार है !………हम अनेकों अपेक्षाओं के साथ उसका पुनः पुनः हार्दिक वंदन अभिनन्दन करते हैं !…..हमें एक और महत्वपूर्ण बात हृदयंगम करनी होगी !……..जीएम फसलें हमारे लिए हानिकारक हैं ,….हमारा कपास का अनुभव अत्यंत बुरा रहा ,…….भारत भूमि पर जीएम फसलों को अनुमति कदापि नहीं दी जा सकती है ,…..हमें अपना सात्विक शोध ढांचा और मजबूत करना होगा !……..कदाचित जीएम फसलें तात्कालिक लाभदायक भी सिद्ध हों …. तो भी ये पृथ्वी पर्यावरण और मानवता के लिए अंततः अहितकर ही होंगी !……..

कृषि कर्जे पर आते हैं !………उत्तर प्रदेश की तर्ज पर लघु मझोले किसानों की कर्जमाफी उचित आवश्यकता लगती है ,……. बड़े किसानों को भी यथासंभव सहायता मिलनी चाहिए !……..लेकिन ,….कृषिकर्म के नाम पर दलाली मक्कारी करने वालों को कोई छूट न्यायसंगत नहीं है !…….हमारे यहाँ परिश्रम से कोसों दूर रहने वाले कुछ किसानों ने कई बैंकों से कर्जा लेकर घी पिया है ,……अब माफ़ी के साथ फिर फ़ौरन कर्जा लेने की भरपूर नीयत रखते हैं ,…ऐसी चंद मानसिकताएं सर्वत्र व्याप्त हैं !…………..चार्वाक मानवता का आदर्श नहीं हो सकता है ,…..यह नीयत राष्ट्रघाती है !……..हमारी सरकारों को सजगतापूर्वक कार्य करना होगा ,…..वैसे यूपी में योगीमाया के आगे सभी नतमस्तक हैं ,…….डेढ़ दशक से चले आ रहे पूर्णभ्रष्ट गुंडा माफिया राज के सफाए में अवश्य ही समय लगेगा ,……..बेईमान बदमाश मंडलियाँ बहुविधि रुकावट डालने में जुटी हैं ,….बेरोजगार हो चुके गुंडे बदमाश अपराध बढ़ाने के प्रयास में हैं ,….वैसे ……मृतप्राय घायल शिकारी पशु भी अधिक आक्रामक हो जाता है !…………पूर्णभ्रष्ट हो चुकी नौकरशाही पर भरोसा होना बहुत कठिन है !…….यूपी की पूववर्ती सरकारों का हर विभाग कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा था !……..सब शिवपाल की बराबरी तो नहीं कर सकते हैं लेकिन मुलायम माया अखिलेश सरकारों का नखशिख भ्रष्टाचार में डूबा था !……तमाम अधिकारी कर्मचारी उनके लिए दो से दस नम्बरी तक धंधा करते थे ,……. आदरणीय योगीजी के सामने कठिन चुनौतियाँ हैं ,…लेकिन …… मोदीजी की तरह योगीजी की सात्विक ऊर्जा भी बहुत प्रबल है ,…यह सनातन विजेता ऊर्जा है !………..खैर …

…कर्जामाफ़ी में सावधानियां आवश्यक हैं !…….कई बैंकों से नाजायज कर्जा लेने वाले परेशान हैं ,…इनकी परेशानी और बढ़नी चाहिए ,…आवश्यकतानुसार इनकी कुर्की जायज होगी !……..भ्रष्ट बैंककर्मियों पर बड़ी कार्यवाही भी आवश्यक विषय है !……कृषि कर्ज के डिफाल्टरों को कदाचित माफ़ी दी जा सकती है ,…लेकिन उन्हें आगे कर्जा लेने से रोकना होगा !…………ईमानदार कर्जदारों को शून्य दर पर फसली कृषि ऋण देना चाहिए !………उपयोगी किसान क्रेडिट कार्ड की ऋण सीमा भ्रष्ट बैंककर्मियों ने खूब नाजायज फैलाई है !………इसे प्रति हेक्टेयर पच्चीस से चालीस हजार तक सीमित होना चाहिए !……….प्राकृतिक आपदा से ग्रसित क्षेत्रों में कृषि से अधिक सहानुभूति की आवश्यकता है !……….

अंततः हम सभी सही गलत आन्दोलनकारियों से विनती करते हैं कि वो अनावश्यक उग्रता का त्याग करें !………सच्ची राष्ट्रहितैषी समर्पित सरकार अपने राष्ट्रवासियों का भरसक भला करेगी !……अपनी यथोचित मांगें रखना हमारा कर्तव्यशील अधिकार है ,….लेकिन …उग्रता के लिए उकसाने वाले लोलुप गद्दारों दलालों से हमें बचना ही चाहिए !……इस परमलीला में देवत्व के साथ दानवत्व का अस्तित्व भी है !…..इसी के प्रभाव से हम महान शूरवीर महाराणा प्रताप और परम आदरणीय सहनशील मेधा बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के नामों पर भिड़ने जैसी मूर्खताएं करते हैं !……….हमें याद रखना चाहिए कि हमारे प्रत्येक कर्म का फल सुनिश्चित है !………हम माने या न माने लेकिन अपने समस्त दुखों सुखों के जिम्मेदार हम स्वयं हैं !……….हमारी प्रत्येक समस्या का सार्थक समाधान सनातन सत्यधर्म में निहित है ,…….सत्य गुप्त रहता है लेकिन सतपथिकों का लक्ष्य अब ज्यादा दूर नहीं लगता है ,…… रुकावटें भी सनातन हैं ,…सर्वशक्तिमान परमप्रभु की लीला कौन समझ सकता है ,…लेकिन वो सबकुछ जानते समझते हैं !……वही हमारे पर्यावरण के प्रथम अंतिम समर्थ स्वामी हैं ,….हम उनकी विधियों से अनभिज्ञ हो सकते हैं ,….लेकिन हमें सुधारने के सभी रास्ते उनके पास हैं !……फिलहाल भारत अपने अंतरिक्ष संस्थान के विज्ञानियों का सादर अभिनन्दन नमन करता है !……….ॐ शान्ति !……….भारत माता की जय !!……………वन्देमातरम !!!

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