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सत्यमेव जयते

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टीम अन्ना समस्या है या समाधान ?

Posted On: 28 Mar, 2012 Others में

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आदरणीय मित्रों ,सादर अभिवादन  .जनलोकपाल क़ानून के लिए  टीम अन्ना फिर से मैदान में कूदने के लिए तैयार है |पूर्व के आंदोलनों चाहे वो जंतर मंतर का अप्रैल अनशन हो या रामलीला मैदान की अगस्त क्रान्ति का लालीपाप जश्न हो, भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए आम नागरिक की हैसियत से मैं सभी आंदोलनों का समर्थन करता रहा ,इनके ऊपर अक्सर प्रश्न भी उठते रहते हैं लेकिन उनको दुर्भावना से ग्रसित बताया जाता है | फिर  इनका समर्थन करने से पहले एकबार इनको समझना चाहता हूँ ,  अपने अल्पज्ञान से कुछ प्रश्नों का उत्तर खोजने का प्रयास करता हूँ ,मूल प्रश्न यही है कि टीम अन्ना समस्या है या समाधान ?

क्या है टीम अन्ना ?..इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले और प्रख्यात समाजसेवी अन्नाहजारे जी के चेहरे के पीछे कुछ लोगों ने एक संगठन बनाया जिसे टीम अन्ना कहा जाता है ,मुख्य चेहरों को देखें तो पायेंगे कि अधिकतर लोग एन जी ओ से जुड़े हैं ,जो विदेशों से भी मोटा चंदा/अनुदान प्राप्त करते हैं , आज की तारीख में एन जी ओ भ्रष्टाचार का सबसे उन्नत रास्ता है ,कह सकते हैं कि हींग लगे ना फिटकरी रंग निकले चोखा !  नेताओ, अधिकारिओं , दलालों का असली साइड बिजनेस यही एन जी ओ हैं ,एन जी ओ समाजसेवा की आड़ में स्वार्थसिद्धि के सबसे बड़ा माध्यम बन चुके हैं ,आश्चर्य तब होता है जब भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए सबकुछ समर्पित करने का दावा करने वाली टीम अन्ना एन जी ओ को लोकपाल से बाहर रखने पर अडिग रहती है !….आखिर क्यों ?

क्या चाहती है टीम अन्ना  ? टीम अन्ना अभी तो केवल जनलोकपाल की बात करती है ,उसके लिए आंदोलनरत है ,यह क़ानून बनने के बाद  फिर चुनाव सुधार और कई मुद्दों पर आन्दोलन करने की बात करती है , ये दूसरी आजादी की बात भी करते हैं , अब यदि दूसरी आजादी के लिए इनके तौर तरीके अपनाये जायेंगे तो कम से कम चालीस पचास साल लग जायेंगे और तब तक  दुनिया पूरी बदल जायेगी ! क्या तब तक भारत देश लुटता रहेगा ?

कौन हैं टीम अन्ना में ? टीम अन्ना के मुख्या चेहरे अरविन्द केजरीवाल ,प्रशांतभूषण ,शशिभूषण ,किरण बेदी ,कुमार विश्वास ,मनीष शिशौदिया आदि हैं ,सबका काम एन जी ओ के इर्द गिर्द ही है , जो भ्रष्टाचार का सबसे सुरक्षित रास्ता माना जाता है ,कुमार विश्वास एक प्रतिभाशाली कवि और वक्ता हैं , भूषण पिता पुत्र प्रख्यात वकील हैं जिनका प्रगाढ़ सम्बन्ध प्रमाणित और स्वघोषित दलाल अमर सिंह से रहा है ,कई मामलों में अदालतों को अपने प्रभाव और लेनदेन से प्रभावित करने की बातें भी सामने आती रहती हैं | देश  इनके ऊपर विश्वास क्यों करे ?

अब बड़ा प्रश्न यह है कि जब स्वामी रामदेव जी देश में लुटेरी व्यवस्था परिवर्तन की जन जागृति ला रहे थे तभी इन्होने आंदोलन किया ! उसकी सफलता में स्वामी जी का बहुत बड़ा योगदान रहा है , फिर भी टीम के कई सदस्यों ने अलग अलग स्वामी जी का अपमान क्यों किया ?

शाही इमाम बुखारी जो खुद को पाकिस्तानी मानते हैं, उनको मनाने के लिए टीम अन्ना क्यों गयी ?

हरबार स्वामी जी से पूरा समर्थन मिलने के बावजूद इन्होने सदैव उनसे निश्चित दूरी ही बनाये रखी ! अब फिर उनसे सहयोग लेने का प्रयास करने लगे हैं ,क्या ये अवसरवादी नही हैं ?

मैं शुरू से ही यह मानता रहा हूँ कि अन्नाजी स्वामीजी के सहयोगी हैं , अभी भी अन्नाजी के प्रति पूरा सम्मान है लेकिन मैं यह समझ नही पा रहा हूँ कि देश में व्यापक सार्थक परिवर्तन के रास्ते में टीम अन्ना समस्या है या समाधान ? यदि किसी के पास इसका उत्तर है तो कृपया अवश्य बताएं ,बहुत आभारी रहूँगा .

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dineshaastik के द्वारा
March 29, 2012

मान्यवर हर अच्छाई में कुछ न कुछ बुराई होती है, और हर बुराई में कुछ न कुछ अच्छाई होती है। वर्तमान परिवेश में राजनीति सबसे गन्दा क्षेत्र है तो क्या हमें राजनीति का परित्याग कर देना चाहिये, कदापि नहीं, अपितु उसमें सुधार करना चाहिये। यह कहना भी उचित एवं न्याय संगत नहीं कि एनजीओ केवल भ्रष्टाचार करने का माध्यम हैं। खास तौर पर किरण बेदी और केजरीवाल के बारे तो हम ऐसा नहीं सोच सकते है।    आदरणीय मान्यवर क्या अन्ना टीम की तरह आप भी परिवर्तन की बारें में नहीं सोचते। यदि हम सोचने के पहले ही हार मान जायेंगे, तो फिर करने का तो कोई औचित्य नहीं है।       आदरणीय रामदेव जी एक आयुर्वेदिक वैद्य से व्यापारी, व्यापारी से संत एवं संत से राजनेता, जबकि अन्ना एक आम आदमी से सैनिक, एक सैनिक से समाज सेवी और एक समाज सेवी से संत, फिर क्यों  न अन्ना टीम पर विश्वास किया जाय।     भूषण पिता पुत्र प्रख्यात वकील हैं, वकालत का व्यवसाय अधिकांशतः अपराधियों पर आश्रित है, सामान्यतः राजनेता अपराधिक पृष्टभुमि से जुड़े होते हैं। अमरसिंह जी का भेद जब तक खुला नहीं था, वह एक सम्मानित राजनेता माने जाते थे…..ऐसे में भूषण पिता-पुत्र जोड़ी को दोषी मान लेना उचित  नहीं है। हो सकता है यह मेरा अल्पज्ञान हो।    अन्ना टीम एवं आदरणीय रामदेव जी की कार्यशैली में अन्तर है, संभवतः विचार धारायें भी प्रथक हैं। किन्तु उद्देश्य एक है, अतः उद्देश्य एक होने के कारण इनका एक होना अनुचित नहीं है। दुर्भाग्य से दोंनो ही अपनी अज्ञात महत्वकांक्षा के कारण एक दूसरे को अपने से आगे नहीं होने देना चाहते। अतः पहले अन्ना टीम रामदेव जी को अपने से प्रथक और अब रामदेव जी अन्ना टीम को अपने से प्रथक रखना चाहते हैं। इसलिये ही दोंनो अपने उद्देश्य में सफल नहीं हो पा रहे हैं। संभवतः दोनों की सलाहकार सीमित सोच रखती है, देश हित की नहीं, अपितु अपने भविष्य की सोच रहे हैं।   मैं इसे न तो एक दूसरे के अपमान की श्रेणी में रखता हूँ, और न ही अवसरवादिता की श्रेणी में रखता हूँ। यह तो एक मात्र वैचारिक मतभेद है, जिसे देश हित के लिये दोनों का दूर करना चाहिये।     यह दोंनो प्रथक- प्रथक स्वयं के लिये समस्या हैं, किन्तु एक होने पर देश की समस्याओं का समाधान हैं। हाँ एक बात और आन्दोलन की सफलता के लिये आवश्यक है कि उसमें सभी वर्ग, सम्प्रदाय एवं जाति के लोग जुड़े। संभवतः बुखारी जी से अन्ना टीम का मिलना इसी परिपेक्ष में हैं। आन्दोलन की सफलता के लिये यह आवश्यक भी है।     नेता सुभाष चन्द्र की आजाद हिन्द भोज से मुसलमान एवं ईसाई नहीं जुड़़ पाये थे। जिस कारण से उन्हें उम्मीद के अनुसार सफलता नहीं मिल पाई थी।


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