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सत्यमेव जयते

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धीरज रखो तनिक हे वीर हृदय |

Posted On: 24 Feb, 2012 Others में

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सभी सम्मानीय विद्वजनों को गोविन्द भारतवंशी का प्रथम नमस्कार| इस मंच पर कभी कभार आ जाता हूँ ,पढ़ते पढ़ते अपनी रचनाओं को प्रकाशित करने का दिल करने लगा है |  शुरुआत करता हूँ स्वामी विवेकानंद जी की कविता से जिसका काव्यानुवाद सुमित्रानंदन पन्त जी ने किया है ..


धीरज रखो तनिक हे वीर ह्रदय !
भले ही तुम्हारा सूर्य बादलों से ढक जाय,
आकाश उदास दिखाई दे ,
फिर भी धैर्य धरो कुछ हे वीर ह्रदय ,
तुम्हारी विजय अवश्यम्भावी है |

शीत के पहले ही ग्रीष्म आ गया ,
लहर का दबाव ही उसे उभारता है
धुप छाँव का खेल चलने दो
और अटल रहो ,वीर बनो |

जीवन में कर्त्तव्य कठोर है ,
सुखों के पंख लग गए हैं ,
मंजिल दूर, धुंधली सी झिलमिलाती है
फिर भी अन्धकार को चीरते हुए बढ़ जाओ ,
अपनी पूरी शक्ति और सामर्थ्य के साथ |

कोई कृति खो नहीं सकती और
कोई संघर्ष व्यर्थ नहीं जायेगा ,
भले ही आशाएं क्षीण हो जाय
और शक्तिया जबाब दे दें |

हे वीरात्मन ,तुम्हारे उत्तराधिकारी
अवश्य जन्मेंगे
और कोई सत्कर्म निष्फल न होगा |

यद्यपि भले और ज्ञानवान कम ही मिलेंगे ,
किन्तु ,जीवन की बागडोर उन्हीके हाथों में होगी ,
यह भीड़ सही बातें देर से समझती है ,
तो भी चिंता न करो ,मार्ग-प्रदर्शन करते जाओ |

तुम्हारा साथ वे देंगे ,जो दूरदर्शी हैं ,
तुम्हारे साथ शक्तिओं का स्वामी है ,
आशीषों की वर्षा होगी तुम पर ,
ओ महात्मन ,

तुम सर्वमंगल हो |

…………………………………………..

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7 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rahulpriyadarshi के द्वारा
February 25, 2012

सकारात्मक सोच को संबल प्रदान करती यह रचना प्रस्तुत कर आपने मजबूत हौसलों को हिम्मत दी है…रविन्द्र बाबु की कालजयी रचना को इस रूप में देख कर अच्छा भी लगा और सद्मार्ग पर डटे रहने की हिम्मत में इजाफा ही हुआ है,आपके इस प्रथम प्रस्तुति का जोश-ओ-खरोश से स्वागत करता हूँ.

    rahulpriyadarshi के द्वारा
    February 25, 2012

    माफ़ी चाहूँगा,एक पल के लिए मैंने विवेकनद जी के सन्देश को भ्रमवश रविन्द्र बाबु की रचना समझ लिया,इसके लिए क्षमाप्रार्थी हूँ.

    Govind Bharatvanshi के द्वारा
    March 1, 2012

    मान्यवर , स्वामी विवेकानंद जी की यह कालजयी रचना सकारात्मक सोच को बहुत संबल देती है ,.आपने प्रस्तुति को सराहा आपका हार्दिक आभार

Jamuna के द्वारा
February 25, 2012

काफी कुछ कहती है यह कविता

    Govind Bharatvanshi के द्वारा
    March 1, 2012

    धन्यवाद जमुना जी

February 25, 2012

सादर नमस्कार! प्रेरक और प्रशंशनीय रचना …..

    Govind Bharatvanshi के द्वारा
    March 1, 2012

    सादर नमस्कार और आपका धन्यवाद


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